सप्तश्रुंग देवी आरती
जय देवी सप्तश्रुंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही बहुरंगा |
उटी शेंदूर अंगा |
जय देवी ॥
पूर्वामुख अंबे ध्यान |
जरा वाकडी मान |
मार्कंडेय देई कान |
सप्तशतीचे पान |
ऐके अंबा गिरी श्रुंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही ....
जय देवी ॥ 1 ॥
माये तुझा बहु थाट |
देई सगुण भेट |
प्रेमे पान्हा एक घोट |
भावे भरले हे पोट |
करु नको मन भंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही ...
जय देवी ॥ 2 ॥
महिशीपुत्र महीषासुर |
दृष्ट कामे असुर |
करी ढाल समशेर |
क्रोधे उडवीले शीर |
शिवशक्ति शिवगंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही ...
जय देवी ॥ 3 ॥
निवृत्ती हा राधासुत |
अंबे आरती गात |
अठराही तुझे हात |
भक्ता अभय देत |
चरणी कमल ही भुंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही ...
जय देवी ॥ 4 ॥