सप्तश्रुंग देवी आरती
जय देवी सप्तश्रुंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही बहुरंगा |
उटी शेंदूर अंगा |
जय देवी ॥
पूर्वामुख अंबे ध्यान |
जरा वाकडी मान |
मार्कंडेय देई कान |
सप्तशतीचे पान |
ऐके अंबा गिरी श्रुंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही ....
जय देवी ॥ 1 ॥
माये तुझा बहु थाट |
देई सगुण भेट |
प्रेमे पान्हा एक घोट |
भावे भरले हे पोट |
करु नको मन भंगा |
अंबा गौतमी गंगा |
नटली ही ...
जय देवी ॥ 2 ॥