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पडताळणी प्रलंबित

चतुःषष्टि योगिनी नाम स्तोत्रम् – २

दिव्ययोगी महायोगी सिद्धयोगी गणेश्वरी ।

प्रेताक्षी डाकिनी काली कालरात्री निशाचरी ॥ १ ॥

हुङ्कारी रुद्रवैताली खर्परी भूतयामिनी । [सिद्ध]

ऊर्ध्वकेशी विरूपाक्षी शुष्काङ्गी मांसभोजिनी ॥ २ ॥

फेत्कारी वीरभद्राक्षी धूम्राक्षी कलहप्रिया ।

रक्ता च घोररक्ताक्षी विरूपाक्षी भयङ्करी ॥ ३ ॥

चौरिका मारिका चण्डी वाराही मुण्डधारिणी ।

भैरवी चक्रिणी क्रोधा दुर्मुखी प्रेतवाहिनी ॥ ४ ॥

कण्टकी दीर्घलम्बोष्ठी मालिनी मन्त्रयोगिनी ।

कालाग्नि मोहिनी चक्री कङ्काली भुवनेश्वरी ॥ ५ ॥

कुण्डला तालकी लक्ष्मी यमदूती करालिनी ।

कौशिकी भक्षिणी यक्षी कौमारी यन्त्रवाहिनी ॥ ६ ॥

विशाला कामुकी व्याघ्री यक्षिणी प्रेतभूषणी ।

धूर्जटा विकटी घोरा कपाली विषलाङ्गली ॥ ७ ॥

चतुष्षष्टिः समाख्याता योगिन्यो हि वरप्रदाः ।

त्रैलोक्यपूजिता नित्यं देवमानुषयोगिभिः ॥ ८ ॥

इति चतुष्षष्टियोगिनी नाम स्तोत्रम् ।

chatushashti 64 yogini nama stotram 2